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क्या कोई दूसरे ग्रह से हमसे बात करना चाह रहा है, अमेरिकी मीडिया में छाई ऐसी ख़बरें

11 Jan 2019 13:07 PM  

नई दिल्ली: अंतरिक्ष में कुछ अद्भुद हो रहा है. अमेरिकी मीडिया में छाई ख़बरों के अनुसार लाख़ों-करोड़ों मील दूरे से धरती पर लगातार रेडियो सिग्नल्स आ रहे हैं. वैज्ञानिकों ने लगातार दूसरी बार ऐसे रेडियो सिग्नल्स को रिकॉर्ड किया है. नेचर नाम की पत्रिक ने इससे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जिससे एलियन लाइफ की बात एक बार फिर शुरू हो गई है.

सिएटल में अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी की 233वीं बैठक में भी इस खोज को पेश किया गया था. ये रेडियो तरंगें महज़ मिलीसेकंड-लंबे रेडियो फ्लैश हैं और इस तरह की रेडियो तरंगें अंतरिक्ष में कोई बड़ी बात नहीं हैं. लेकिन ये सिर्फ दूसरा सिग्नल है जिसे दूसरी बार दर्ज किया गया है. ये बात एक रहस्य है कि ऐस तरंगें कैसे पैदा होती हैं और कहां से आती हैं जो हमेशा ऐसे विश्वास को बल देती हैं कि धरती से उन्नत सभ्यताएं अंतरिक्ष में मौजूद हैं.

ऐसे पहले सिग्नल को FRB 121102 नाम दिया गया था जो 2015 में Arecibo रेडियो टेलीस्कोप द्वारा खोजा गया था और ये 2018 इस जानकारी को सार्वजनिक किया गया कि ये भारी मात्रा में ऊर्जा से भरा था. इस नए सिग्नल को FRB 180814.J0422+73 का नाम दिया गया है. 1.5 बिलियन प्रकाश वर्ष दूरी से एक ही लोकेशन ये सिग्नल छह बार रिकॉर्ड किया गया. ये नए कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट यानी चाइम द्वारा दर्ज किए गए सबसे पहले तरंगों में से एक है.

हालांकि, अभी दर्ज किए गए ये रेडियो सिग्नल्स से भी इनसे जुड़े रहस्यों से पर्दा नहीं उठता. लेकिन इसे रिकॉर्ड करने वाले खोजकर्ता को लगता है कि ऐसी और तरंगें जल्द ही दर्ज की जाएंगी जिससे ये पता चल सकेगा कि ये कहां से आ रही हैं. चाइम टीम के एक सदस्य और ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में खगोल भौतिकीविद इन्ग्रिड स्टेयर्स ने कहा, "एक बार फिर इन सिग्नलों को दर्ज किए जाने के बाद ऐसा लगता है कि वहां (अंतरिक्ष में) काफी कुछ हो सकता है."

उन्होंने ये भी कहा कि अगर ऐसे सिग्नलों को बार-बार दर्ज किया जाता है और उनका अध्ययन किया जाता है तो इससे जुड़े रहस्य को सुलझाने में सफलता मिल सकती है. इसके बाद पता चल सकता है कि वो कैसे और कहां पैदा हुईं. एक धड़े का मानना ये है कि शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं की वजह से ये तरंगे पैदा हो रही हैं. पहली बार दर्ज की गईं रेडियो तरंगे 700 मेगाहर्ट्ज़ की आवृत्ति पर दर्ज की गई थीं. लेकिन कुछ 400 मेगाहर्ट्ज़ से कम थीं.


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